ترکیب‌بندی

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نمونه‌ای از هنر ترکیب بندی

ترکیب‌بندی یا کمپوزیسیون (به فرانسوی: Composition) در هنرهای گوناگون به معنای تنظیم جایگاه اجزای یک اثر است که هنرمند برای ایجاد وحدت و تناسب بین بخش‌های مختلف اثر خود به کار می‌برد. برای مثال یک شهر، یک اثر معماری، یک اثر موسیقایی، شعر و داستان، و آثار نقاشی و عکاسی و طراحی دارای ترکیب‌بندی‌های متفاوت ویژه‌ای هستند که هنرمند برگزیده‌است. تعادل،[۱] تقارن و ریتم از عواملی هستند که در کمپوزیسیون به آن‌ها توجه می‌شود.[۲]

اصول ترکیب‌بندی[ویرایش]

اصول ترکیب‌بندی نسبت‌ها، مفاهیم و تعاریفی هستند که در بیشتر هنرهای تجسمی با رعایت آن‌ها به چشم‌نوازی اثر افزوده می‌شود. این چشم‌نوازی نسبی است یعنی ممکن است در نظر همه چشم‌نواز محسوب نشود. دانستن این اصول و استفاده آگاهانه از آن‌ها می‌تواند به زیبایی بصری عکس کمک کند. برای مثال: نسبت‌های طلایی، قانون دو سوم‌ها، فضای منفی، تقارن نامتقارن و مانند آن‌ها.

به جای دادن منطقی عناصر تجسمی در فضای مورد نظر، در سطح دو بعدی یا سه بعدی ترکیب بندی یا کمپوزیسیون می‌گویند. ترکیب بندی تحت قواعد و اصول معین و محاسبات دقیق انجام می‌گردد و بین عناصر تصویری ارتباط، پیوند و روابط منطقی ایجاد می‌کند.

نظم و ترتیب دادن، برنامه‌ریزی کردن بین عناصر تصویری، منسجم نمودن قسمت‌ها با هم، ترکیب کردن و کنار هم قرار دادن آنها، ساختار و سازماندهی عناصر تجسمی و هماهنگ کردن همهٔ اجزا با هم، مفهوم ترکیب را مشخص می‌کند. مفهوم ترکیب بندی یا کمپوزیسیون با مفاهیم دیگر از جمله: COMPOSITION، Formation، ارتباط و مطابقت دارد که هر کدام به نحوی به در خلاقیت تجسمی مصداق پیدا می‌کند.

اصطلاح ترکیب در همهٔ هنرها به خصوص هنرهای تجسمی بکار می‌رود. مانند ترکیب موسیقی، یا ترکیب نقوش هندسی و غیر هندسی، ترکیب شکل‌های انتزاعی ترکیب یک فیلم سینمایی و به‌طور کلی ترکیب یک اثر هنری.

شکل‌ها نسبت به فضایی که اشغال می‌کنند جلوه‌های متفاوتی به خود می‌گیرند و در اثر نیروهای بصری ناشی از شکل و زمینه مفهوم جداگانه بدست می‌آورند. هر شکل ثابت، مثلاً یک دایره، در داخل مربع، مربع مستطیل، لوزی و حتی دایره جلوه‌های متغیر به خود می‌گیردو خصوصیات تصویری آن متغیر می‌شود. بدین ترتیب هر شکل و نقشی نسبت به فضا و شکل اطراف جلوه و معنای خاص پیدا می‌کند که ناشی از نیروهای بصری است. در نتیجه هر واحد بصری موقعیت فضایی و جلوه و نمود خود را به واسطه روابط فعال و متقابل واحدهای تصویری پیرامون خود کسب می‌کند و نیروهای تصویری که از جهات مختلف، راست و چپ، بالا و پایین، جلو و عقب بر آن اثر می‌گذارند موقعیت فضایی آن را ایجاد می‌کنند. علاوه بر آن رنگ با ارزش‌های تصویری خاص خود که دائماً تحت تأثیر و دگرگونی شرایط فضایی و تابش نور می‌باشد، و بافت نیز به صورت مؤثر در مشخص کردن موقعیت فضایی و کیفیات بصری عناصر تصویری مؤثر هستند.

ترکیب بندی با تشابه[ویرایش]

اگر در ترکیبی شکل، اندازه، رنگ یا بافت فرم‌های واحد کمی تغییر کند این فرم‌ها دیگر قسمتی از یک ساختار تکرار محض نیستند، بلکه با تشابه بیشتر و به صورت آزادتری به یک دیگر مربوط می‌شود. تشابه می‌تواند چگونگی استقرار فرم‌های واحد را نشان دهد. ترتیب استقرار مشابه فرم‌های واحد ممکن است به یک ساختار تکرار، شعاعی یا تغییر تدریجی شبیه شود.

ترکیب بندی با تمرکز[ویرایش]

اجتماع فرام‌های واحد در نواحی خاصی از ترکیب (تمرکز) نامیده می‌شود. تمرکز حرکاتی موزون ایجاد می‌کند و اغلب یک مرکز توجه اصلی و تعدادی مرکز فرعی به وجود می‌آورد. تمرکز پدیده‌های طبیعی را نیز تداعی می‌کند، مانند ابرهای زودگذر، پاشیده شدن آب، ریزش برگ‌ها و مهاجرت پرندگان.[۳]

ترکیب در طراحی سنتی ایران[ویرایش]

مقصود از ترکیب، کنار هم چیدن عناصر، و در مورد هنر نقش‌هایی است که در نهایت وحدت ایجاد کند. یگانگی، هدف شکل و محتوای ترکیب است. به هیچ وجه نمی‌توان نقش‌های آماده (طراحی و رنگ شده) را پهلوی هم چید و نام آن را طراحی گذاشت، اشتباهی که اغلب و اکنون به ویژه طراحانی می‌کنند که به جای قلم از رایانه استفاده می‌کنند. در کار طراحی سنتی گذشته از اینکه نقش‌ها باید با هم سازگار و همجنس باشند، باید هر یک رنگ‌بندی مناسب خویش و در عین حال مناسب دیگر اجزا کنار خود و زمینه کار داشته باشند و مقصود از ترکیب همین است. ترکیب وحدتی است که از کثرت پدید می‌آید و بنابراین طراح باید بسیار سنجیده و کار آزموده باشد و نه تنها ترکیب شکل‌ها (فرم‌ها) بلکه رنگ‌ها را خوب بشناسد و در کار خویش تضاد، ناسازگاری، نقطهٔ ضعف و امثال آن‌ها باقی نگذارد. در نظر گرفتن نه تنها تناسب متن و حاشیه، متن و اجزا درون آن بلکه ملاحظه اجزا مناسب متن و حاشیه از مهم‌ترین عوامل موفقیت طرح و کمال آن است.

باید توجه داشت که طراحی سنتی ایران،خود فرهنگ بالغی است که از طریق کوشش‌های نسل‌های فراوان و گاه بسیار هوشیار، دانشمند و هنرمند پدید آمده است؛ بنابراین رعایت مبانی آن ناگزیر است. ترکیب نه تنها در طراحی سنتی، یعنی طرح کاشی، قالی، کارهای فلزی و چوبی اهمیت دارد، بلکه یکی از مهم‌ترین کارکردهای آن در معماری سنتی ایران است که مشمول عمده قواعد طراحی سنتی است. نقشه کلات‌ها (چه به شکل دژ و چه به صورت روستا یا قلعه) و نیز نقشه باغ‌ها، کوشک‌ها و خانه‌ها و مسجدهای ایران تابع آن است.[۴]

جستارهای وابسته[ویرایش]


پانویس[ویرایش]

  1. هنری رانکین‌پور
  2. م. آلیاتوف
  3. اصول و مبانی هنرهای تجسمی زبان بیان معماری
  4. حصوری، علی، مبانی طراحی سنتی در ایران، نشر چشمه

منابع[ویرایش]

  • دکتر محمد حسین حلیمی =، اصول و مبانی هنرهای تجسمی زبان بیان معماری
  • آلیاتوف، م. (۱۳۷۲تاریخچه کمپوزیسیون نقاشی، ترجمهٔ نازلی اصغرزاده، نشر دنیای نو، ص. ص٫ ۹ تا ۱۲
  • رانکین‌پور، هنری (۱۳۸۲ترکیب‌بندی در نقاشی، ترجمهٔ فرهاد گشایش، انتشارات لوتس، ص. ص٫ ۴، شابک ۹۶۴-۹۳۳۰۲-۰-۸
  • وسیوس ونگ، اصول فرم و طرح

Компози́ция (от лат. compositio «складывание, соединение, сочетание») — одна из основных категорий художественного творчества. В отличие от рисунка, цвета, линии, объема, пространства представляет собой не один из компонентов художественной формы, а художественно-образную, содержательно-формальную целостность — наиболее сложный и совершенный тип структуры, в котором все элементы органично связаны между собой.

Описание

Такая целостность в архитектуре, живописи, графике, скульптуре, декоративно-прикладном искусстве и дизайне имеет иррациональную природу, достигается художником интуитивно, она оригинальна и неповторима. Иными словами, единственное, уникальное сочетание элементов и составляет суть композиционной целостности. Эта специфическая целостность основана на следующих принципах: новизны, ясности, целостности, развития. Композиция — открытая модификационная структура «со многими степенями свободы». Это духовный феномен, материализующийся лишь частично и несовершенно. Закономерности композиционной организации носят не абсолютный, как в технических системах, а относительный характер. Они проявляются в форме тенденций, мера осуществления которых зависит от многих объективных и субъективных, внешних и внутренних факторов. Композиционная целостность может быть исследована рациональными приемами лишь частично. Например, конструкция живописной картины, система пропорционирования в архитектуре, антропометрические данные или психо-физиологические особенности зрительного и тактильного восприятия.

Классическое определение композиции в изобразительном искусстве дал в эпоху итальянского Возрождения теоретик и архитектор Л.Б. Альберти в трактате «Три книги о живописи» (1435–1436): «Композиция—это сочинение, выдумывание, изобретение» как «акт свободной художнической воли» [1]. К общему смыслу латинского слова здесь прибавляется усиленный пафосом ренессансной эпохи момент «изобретения, выдумывания», свободы воображения, права художника, как тогда говорили, на «сочинение историй» в противоположность средневековой традиции следования образцам (ит. сomponimento — сочинение). Предположительно, такое понимание композиции Альберти заимствовал из классической филологии. Альберти рассматривал композицию не в форме завершенной картины, а в качестве метода творческого процесса художника, раскрывающего последовательность и содержание основных этапов работы. Причем композицию Альберти понимал как «живой организм» и как красоту, к которой «ни прибавить, ни убавить, ни изменить ничего нельзя, не сделав хуже». Последнее уточнение имеет частный характер и связано с эстетикой эпохи Возрождения, стремлением к идеальной, уравновешенной форме произведения искусства. Согласно определению русского художника и ученого-психолога Н.Н. Волкова (1897–1974), композиция — это «конструкция для смысла» [2], в иной формулировке — «алгоритм творческого процесса». По определению С.М. Даниэля композиция — это не состояние (даже в относительном смысле), а «процесс, регулирующий развертывание идеи»[3].

Теории композиции в изобразительном искусстве в отечественной историографии посвящены работы В.А. Фаворского, А.Д. Гончарова, Л.Ф. Жегина, И.И. Иоффе, П.Я. Павлинова, С.М. Даниэля, В.Г. Власова, А.В. Свешникова. В начале XXI в. композицию во всех видах архитектонически-изобразительных, или пластических, искусств всё чаще рассматривают в качестве диссипативных (открытых, «рассеянных») систем, кластерных или фрактальных структур с применением методики компьютерного моделирования [4].

Композиционные приемы

  • Акцентирование зрительного центра (смыслового, геометрического);
  • Выявление связующих элементов, сильных и слабых долей изобразительного поля, мажорных и минорных диагоналей;
  • Пропорционирование, в частности с использованием золотого сечения;
  • Пондерация (уравновешивание неравновесных частей).

Композиционные средства (имеют парный характер)

  • Метр-ритм;
  • Симметрия-асимметрия;
  • Контраст-нюанс;
  • Консонанс-диссонанс;
  • Величина-масштабность;
  • Отношения величин-пропорции;
  • Подобие-различие

Конструктивные приемы

  • "Картина в картине" (подобие форматов);
  • "Скос угла";
  • Параллельность диагоналей (использование "правила прямого угла");
  • Затемнение переднего плана с акцентированием трех пространственных слоев;
  • Уподобление силуэтов различных пространственных планов;
  • Акцентирование "диагонали входа";

Виды композиции

  • Фронтальная и плоская
  • Объёмная 
  • Пространственная

Типы композиции

Михаил Врубель, «Сирень»
Членение на слои

Пространство создают фигуры, а не располагаются в нём, перекрывая друг друга и мерой своей законченности, и располагаясь ниже или выше на холсте. Такой тип характерен для иконы.

Членение на планы

Берёт свои истоки в эпоху. Картины при этом состоят из двух планов: хорошо развитого плана с действием и архитектурного или природного пейзажа. Позже стали появляться третий, четвёртый планы.

Построение пространства цветом

См. работу Михаила Врубеля «Сирень».

Интерьерное построение пространства
«Крестный ход», Илларион Михайлович Прянишников

«Завтрак аристократа», «Сватовство майора» Павла Федотова.

Пластическое построение пространства

Построение пространства фигурами, имеет несколько разновидностей:

Фигуры надвигающиеся на зрителя

«Сдача Бреды» Диего Веласкеса.

Фигуры, движущиеся к зрителю или от зрителя

«Крестный ход» Прянишникова.

Композиция с выраженным композиционным центром
Композиция с использованием симметрии

Этот тип использовался в эпоху Ренессанса[источник не указан 2279 дней]. Примеры — «Тайная вечеря» Леонардо да Винчи, «Афинская школа» Рафаэля

См. также

Примечания

  1. Альберти Л. Б. Десять книг о зодчестве: в 2 т. Т. 1. М., 1935. Кн. шестая. Глава вторая. С. 178.
  2. Волков Н. Н. Композиция в живописи. М., 1977. С. 13.
  3. Даниэль С. М. Картина классической эпохи: проблема композиции в западноевропейской живописи XVII века. Л., 1986. С.122
  4. Власов В. Г. Теория хаоса, аритмология и методы кластерного анализа в современном искусствознании // Электронный научный журнал «Архитектон: известия вузов». — УралГАХА, 2015. — № 51

Источники

  • Власов В. Г. Искусство России в пространстве Евразии: В 3 Т. Т. 3. Классическое искусствознание и «русский мир». СПб.: Дмитрий Буланин, 2012. С. 85—155.
  • Власов В. Г. Теория формообразования в изобразительном искусстве. СПб.: Изд-во СПбГУ, 2017.
  • Даниэль С. М. Картина классической эпохи: Проблема композиции в западноевропейской живописи XVII века. — Л.: Искусство, 1986. — 196,[3] с., [12] л. цв. ил.
  • Левандовский С. О сюжете и композиции // Художник. 1981, № 4. С.58-61.
  • Гончаров А.Д. О композиции // Художник. 1981, № 6. С.34-37.
  • Жегин Л. Ф. Язык живописного произведения. М.: Искусство, 1970.
  • Фаворский В. А. Литературно-теоретическое наследие. М.: Советский художник, 1988.