کاروَند نام یکی از کتابهای نوشته شده به زبان و خط پهلوی است که شوربختانه دیگر متن آن در دسترس نیست. این کتاب، یک کتاب آموزش ادبی بوده که درباره بکارگیری روشهای شیوایی و رسایی گفتار و نوشتار، نوشته شده بودهاست. متن پهلوی این کتاب، دست کم تا سده سوم هجری در دسترس بوده و گویی در این زمان، دستهایی درکار بوده که نوشتههای پهلوی را از میان بردهاند[۱] .
جاحظ در در آغاز جلد سوم البیان و التبیین از کتاب کاروند در شیوایی و رسایی گفتار تعریف میکند و مینویسد: آنکس که دوست دارد به صنعت بلاغت دسترسی یابد و با شگفتیها آشنا شود و در واژهشناسی استادی یابد پس کتاب «کاروند» را که از کتابهای پهلوی است بخواند [۲]. جاحظ که خود از پیشوایان شیوایی گفتار و سخندانی است، در جای جای البیان و التبیین مهارت ایرانیان را در سخنوری و گزیده گویی ستودهاست. همچنین درباره کتاب کاروند، در الفهرست ابن ندیم نیز سخن به میان آمدهاست[۳] .
بنمایهها [ویرایش]
- ↑ M. Inostranzev. Iranian Influence on Moslem Literature, Part 1. The Echo Libray، 2007.
- ↑ دانشنامه جهان اسلام، جاحظ
- ↑ ابن ندیم. الفهرست. ترجمهٔ محمد رضا تجدد. امیرکبیر، ۱۳۶۶.
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